✍ अहिंसा के अवतार और मानवता के पथ-प्रदर्शक भगवान महावीर का आज ‘जन्मकल्याणक’

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  ● दिनविशेष ●  

अहिंसा के अवतार और मानवता के पथ-प्रदर्शक भगवान महावीर का आज ‘जन्मकल्याणक’

‘वर्धमान’ से ‘महावीर’ बनने की गाथा: ‘जियो और जीने दो’ का अमर संदेश आज भी प्रासंगिक


वणी | वणी समाचार विशेष । ३१ मार्च २०२६ :

आज चैत्र शुक्ल त्रयोदशी है। यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि वह पावन दिन है जब इस धरा पर सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह की साक्षात मूरत, जैन धर्म के २४वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का अवतरण हुआ था। कुंडलपुर के राजमहल से लेकर दीक्षा के कठिन तप तक, महावीर का जीवन हर मनुष्य के लिए आत्म-कल्याण का मार्ग है।

भगवान महावीर के चरणों में नमन करते हुए काव्य पंक्तियाँ स्मरण आती हैं:

“अहिंसा की मशाल जिसने जलाई,
त्याग और तप की मूरत जो कहलाई।
वीर वो नहीं जो रण में शत्रु को मारे,
वीर वो जो अपनी इंद्रियों को ही हारे।।”

भगवान महावीर की महिमा को इन पंक्तियों में पिरोया जा सकता है:

“छोड़ कर राज-महल की माया, तप का मार्ग जिसने अपनाया। कण-कण में देखा जीव का वास, जन-जन में जगाया आत्म-विश्वास। अहिंसा का अमृत पिलाया सबको, सत्य की राह दिखाई जग को।।”

🕉️ जन्मकल्याणक: एक राजपुत्र का ‘महावीर’ बनने का सफर

महाराजा सिद्धार्थ और माता त्रिशला के आंगन में जन्में बालक ‘वर्धमान’ ने वैभव को नहीं, बल्कि विवेक को चुना। भगवान महावीर का जीवन हमें सिखाता है कि सुख बाहर की वस्तुओं में नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धता में है।

📌 महावीर स्वामी के पंचशील सिद्धांत: जीवन बदलने वाले सूत्र

भगवान महावीर ने संपूर्ण विश्व को पाँच महान सत्य दिए, जो आज के अशांत युग में शांति का एकमात्र मार्ग हैं:

१. अहिंसा (Non-violence): मन, वचन और कर्म से किसी को कष्ट न देना। “अहिंसा परमो धर्मः।”

महावीर की अहिंसा केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक भी है।

“सव्वे जीवा वि इच्छन्ति जीविउं न मरिउज्जिउं, तम्हा पाणिबधं घोरं निग्गन्था वज्जयन्ति णं।”

(अर्थ: सभी जीव जीना चाहते हैं, मरना कोई नहीं चाहता। इसलिए निर्ग्रंथ मुनि किसी भी प्राणी की हिंसा नहीं करते।)

२. सत्य (Truth):सदैव सत्य का साथ देना, क्योंकि सत्य ही ईश्वर है।

३. अचौर्य (Non-stealing): किसी दूसरे की वस्तु पर कुदृष्टि न डालना।

४. ब्रह्मचर्य (Chastity): इंद्रियों पर संयम रखना और पवित्र जीवन जीना।

५. अपरिग्रह (Non-possession):आवश्यकता से अधिक वस्तुओं का संग्रह न करना।

⚖️ ‘जियो और जीने दो’ (Live and Let Live)

  • महावीर स्वामी का सबसे अनमोल सूत्र था— “मित्ती मे सव्व भूएसु, वेरं मज्झं न केणई” (मेरा समस्त जीवों के साथ मैत्री भाव है, किसी के साथ मेरा वैर नहीं है)। उन्होंने न केवल मनुष्यों बल्कि पशु-पक्षियों और वनस्पति में भी जीव के अस्तित्व को स्वीकारा और उनके प्रति करुणा भाव रखने का संदेश दिया।

भगवान महावीर का सबसे प्रसिद्ध नारा “जियो और जीने दो” (Live and Let Live) सह-अस्तित्व का आधार है। उन्होंने ‘अनेकांतवाद’ का सिद्धांत दिया, जो सिखाता है कि सत्य के कई पहलू हो सकते हैं।

“जैसे एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं, वैसे ही हर व्यक्ति के विचार में कुछ सत्य हो सकता है। दूसरों के मत का सम्मान करना ही सच्चा ज्ञान है।”

यह विचार आज के राजनीतिक और सामाजिक मतभेदों को सुलझाने के लिए सबसे सशक्त हथियार है।

🔱 आज के संदर्भ में महावीर के दर्शन की आवश्यकता

आज जब ‘विश्व’ युद्ध, तनाव और ईर्ष्या की आग में जल रहा है, तब महावीर का ‘अनेकांतवाद’ (Syadvada) हमें दूसरों के दृष्टिकोण को समझने की शिक्षा देता है। उनके अनुसार, सत्य के कई पहलू हो सकते हैं, इसलिए हठ छोड़कर सामंजस्य अपनाना ही मानवता है।

“जिसने मन को जीता है,
वही सच्चा शूरवीर है।
महावीर के पथ पर चलकर ही,
शांत बनता यह नीर है।।”

🔱 कलिकाल में महावीर के संदेश की गूँज

आज जब धरती परमाणु युद्धों के मुहाने पर खड़ी है, प्रदूषण और स्वार्थ चरम पर है, तब महावीर का ‘करुणा भाव’ ही हमें बचा सकता है। उन्होंने कहा था कि आत्मा ही ईश्वर है और हर जीव में परमात्मा बनने की शक्ति है।

“आत्मा सो परमात्मा,
यही है सच्चा ज्ञान।
दया धर्म का मूल है,
महावीर का है वरदान।।”


भगवान महावीर के जन्मकल्याणक के इस पावन अवसर पर आइए हम संकल्प लें कि हम अपने भीतर के क्रोध, अहंकार और लोभ का त्याग करेंगे और प्रेम व अहिंसा के मार्ग पर चलेंगे।

“भगवान महावीर स्वामी ” के जन्मकल्याणक की आप सभी को मंगलमयी शुभकामनाएँ !


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